← back to browse · #1544
रसिकमंजरी-वृत्ति
by गोपालभट्ट · 19 · संस्कृत
Details
Source
View this manuscript on the LD Institute of Indology catalogue:
Open on ldindology.org ↗Share
https://mss-mirror.vercel.app/manuscript/1544
Related manuscripts
सारस्वत व्याकरण(गोपाली(त्रीजी) वृत्ति
गोपालभट्ट
1758
व्याकरण
रतिरहस्य
कुक्कोक
18
शृंगार
शृंगारतिलक
—
19
शृंगार
शृंगार- श्लोको
—
19
शृंगार
कामरत्न
प्राणनाथ भट्ट
19
शृंगार
दूहासंग्रह
—
18
शृंगार
शृंगारशतकरसिकमंजरी वृत्ति
अमरुकवि
1552
शृंगार
रससागर
कविबीरबल
18
शृंगार
समाशृंगार-वर्णकग्रंथ
—
1882
शृंगार
अनंगरंग
कवि कल्याणमल्ल
1701
शृंगार
शृंगारदर्पण
—
18
शृंगार
विरहदूहा कुंडलीया
—
1768
शृंगार