| 42938/2 |
सीमंधरस्वामी पासे कालिकाचार्यनी प्रसंशा करतोदेव (रंगीन) |
— |
— |
16 |
खंडित |
| 42938/4 |
कालिकाचार्य गर्दभिल्ल युद्ध (रंगीन) |
— |
— |
16 |
खंडित |
| 42957 |
प्रश्न शुकुनावली सचित्र |
— |
ज्योतिष |
16 |
खंडित-जीर्ण |
| 82106 |
उत्तराध्ययन सूत्र- अवचूरि |
ज्ञानसागर सूरि |
— |
16 |
मध्यम |
| 50077/2 |
नवखंड पार्श्वनाथ नाम स्तवन सावचूरि |
रत्नशेखर गणि |
— |
16 |
श्रेष्ठ |
| 42902 |
पार्श्वनाथ स्तवन (सुवर्णाक्षरीय) |
— |
स्तुति |
16 |
जीर्णखंडित |
| 82317 |
उत्तराध्ययन सूत्र वृत्ति |
— |
आगम |
16 |
श्रेष्ठ |
| 44909/4 |
This is single part pothi |
— |
— |
16 |
श्रेष्ठ |
| 43259 |
सुवर्णाक्षरी लखवा माटे हरताल थी लखेलुं पानुं |
— |
— |
16 |
श्रेष्ठ |
| 82338 |
सुरथोत्सव महाकाव्य |
सोमेश्वर देव (गूर्जरेश्वर पूरोहित) |
— |
16 |
— |
| 46823/1 |
नंदीश्वर दीप स्थापना (मात्र रेखाचित्र ) |
— |
विधि विधान |
16 |
श्रेष्ठ |
| 43270 |
नवकार अने गौतम स्तुति सुवर्णाक्षरी |
— |
— |
16 |
खंडित |
| 12511/1 |
भाष्यत्रय |
देवेन्द्रसूरि |
— |
16 |
श्रेष्ठ |
| 80907 |
पर्यंताराधना -सबालावबोध |
— |
— |
16 |
— |
| 61536 |
उपदेश माला बालावबोध |
धर्मदास गणि |
उपदेश |
1556 |
जीर्ण |
| 34716 |
षडावश्यक वृत्ति |
— |
आवश्यक |
1569 |
जीर्ण |
| 61528 |
दशवैकालिक चूर्णि |
— |
आगम |
1580 |
जीर्ण |
| 1325 |
अष्ट प्रकारीपूजा कथा |
चंद्रप्रभमहत्तर |
कथा |
1582 |
श्रेष्ठ |
| 80766 |
वेताल पचीसी |
ज्ञानचंद्र सौराष्ट्र गच्छीय |
— |
1590 |
— |
| 31769 |
कालिकाचार्य कथा (सचित्र- (सोनेरी चित्रो) ह.प्र. 95 |
— |
कथा |
1599 |
जीर्ण |
| 58776 |
दश वैकालिक बालावबोध |
शय्यंभव |
आगम |
1602 |
मध्यम |
| 83263 |
संग्रहणी प्रकरण बालावबोध |
— |
— |
1605 |
— |
| 59925 |
षट् स्थानक वृत्ति |
— |
— |
1607 |
मध्यम |
| 61225 |
विचार ग्रंथ बालावबोध |
— |
तत्त्वज्ञान |
1609 |
मध्यम |
| 32908 |
सुंदर प्रकाश |
पद्मसुंदर |
— |
1610 |
श्रेष्ठ |
| 35145 |
सारस्वत टीका |
— |
व्याकरण |
1611 |
मध्यम |
| 61530 |
भगवती चूर्णि |
— |
आगम |
1613 |
जीर्ण |
| 81913 |
संग्रहणी प्रकरण सह बाला. |
श्रीचंद्र सूरि |
— |
1615 |
— |
| 44126 |
तिलकमंजरी टीका (फोटो कोपी) |
— |
— |
1615 |
मध्यम |
| 59867 |
औप पातिक सूत्र वृत्ति |
— |
आगम |
1617 |
जीर्ण |
| 80733 |
विवेकविलास |
जिनदत्त सूरि खरतर |
— |
1619 |
— |
| 82960 |
सारस्वत मंडन (सारस्वत व्याकरण वृत्ति) |
मंडन संघपति |
— |
1623 |
— |
| 59773 |
श्राद्ध प्रतिक्रमण सूत्र टीका |
— |
आचार |
1625 |
मध्यम |
| 61013 |
कर्म ग्रन्थ वृत्ति |
— |
कर्म |
1626 |
जीर्ण |
| 82662 |
सम्यक्त्व सार रास (श्रेणिक राज रास) |
सोमविमल सूरि |
— |
1630 |
— |
| 81906 |
संग्रहणी प्रकरण |
श्रीचंद्र मुनि |
— |
1636 |
— |
| 81654 |
दशवैकालिक सूत्र- बाला.सह |
शय्यंभव सूरि |
आगम |
1639 |
जीर्ण |
| 58939 |
विचार षट् त्रिंशिका अवचूरि |
— |
— |
1643 |
मध्यम |
| 61456 |
लघुशान्ति स्तव टीका |
— |
स्तवन |
1644 |
श्रेष्ठ |
| 82798 |
समकित कौमुदी चरित्र - चउपई |
हीरकलश (खरतर) |
— |
1644 |
— |
| 82183 |
अजापुत्र रास |
— |
— |
1645 |
— |
| 44408/2 |
(षड्भाषा मथ) चंद्रप्रभ जिनस्तवन |
(षड्भाषा) |
स्तुति |
17 |
श्रेष्ठ |
| 82753 |
षडावश्यक - बाला सह |
— |
— |
17 |
— |
| 31653 |
इलाचीपुत्र रास |
— |
— |
17 |
जीर्ण |
| 82653 |
विदग्ध मुख मंडन- अवचूरि |
— |
— |
17 |
— |
| 82681 |
सूत्रकृतांग सूत्र (प्रथम श्रुत स्कंध) |
सुधर्मस्वामी |
— |
17 |
— |
| 82193 |
सारस्वत व्याकरण वृत्ति |
पुंजराज |
— |
17 |
— |
| 82186 |
अभिधान चिंतामणि - बीजक |
— |
— |
17 |
— |
| 82181 |
संग्रहणी प्रकरण - सह बाला. |
श्रीचंद्र सूरि मलधारी |
— |
17 |
— |
| 82104 |
सिंघल सारीय चारित्र (चोपई) |
मलयचंद |
— |
17 |
— |