| 80742 |
सिंहासन द्वात्रिंशिका (विक्रम चरित्र) गद्य |
क्षेमंकर मुनि |
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| 80752 |
काशिका विवरण पंजिका-न्यास |
जिनेंद्र बुद्धि आचार्य |
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मध्यम |
| 80755 |
सिद्धहेम शब्दानुशासन - उणादिगण सह विवरण |
हेमचंद्र सूरि |
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| 80758 |
वृत्त रत्नाकर छंद शास्त्र - सह वृत्ति |
केदार भट्ट |
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| 80763 |
उत्तराध्ययन सूत्र - वृत्ति सह |
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जीर्णप्रायः |
| 80765/1 |
गुणस्थान क्रमारोह प्रकरण - सह स्वोपज्ञ वृत्ति |
रत्नशेखर सूरि |
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मध्यम |
| 80772 |
सारस्वत व्याकरण - सह टिप्पणी |
अनुभूत स्वरूपाचार्य |
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| 80777 |
राजप्रश्नीयवृति |
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| 80779 |
रसिकप्रिया टबो |
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| 80780 |
लाट्यायन सूत्र |
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| 80784 |
वंकचूल चोपई |
तीकमजी नागोरीगच्छीय |
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| 80788 |
विचारसार ग्रंथ (पञ्चपदार्थ) सह स्तबक |
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| 80799 |
उपदेश साहस्री वृत्ति शिष्यप्रतिबोधन सटीक - प्रथमविव्रत सह |
शंकर भवगवत्पाद |
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| 80800 |
उपदेश साहस्री-महावाक्य प्रकरण-सटीक |
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| 80801 |
उपदेश साहस्री वृत्ति - उत्तरार्ध सह |
शंकर भवगवत्पाद |
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मध्यम |
| 80802 |
गोमटसार |
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| 80803 |
तिथिनिर्णयसिन्धु |
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| 80806/6 |
सत्ता त्रिभंग यंत्र - सह टिप्पणी |
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| 80808 |
सुभाषित रत्न संदोह- सह टिप्पणी |
अमितगति दिगंबर माथुरान्वीय |
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| 80810 |
कैयटभाष्य पाणिनि व्याकरण महाभाष्य प्रदीप - द्वितीय हिनक पंचमाध्याय, प्रथम पाद |
कैय्यट |
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अतिजीर्ण |
| 80811 |
उपदेश साहस्त्री- वृत्ति सह - चैतन्य प्रकरण |
शंकराचार्य |
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श्रेष्ठ |
| 80816 |
षट् प्राभृत - सह वृत्ति |
कुंदकुंदाचार्य दिगंबर |
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| 80818 |
वीर सिंहावलोक |
वीरसिंह देव - तोमरवंशीय नृप |
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| 80819/1 |
वर्धमान जिन स्तुति (दंडक छंदोबद्ध) |
मुनि सुंदर सूरि |
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| 80819/2 |
विचारमृत संग्रह |
कुलमंडन सूरि |
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| 80820 |
अनुयोगद्वार चूर्णि |
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| 80821 |
विवेक मंजरी प्रकरण - सह वृत्ति |
आसड |
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| 80823 |
हरिभक्ति विलास किंचिद पूर्ण |
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| 80825 |
भगवती सूत्र सस्तबक |
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| 80827 |
उत्तराध्ययन सूत्र वृत्तिगत कथा |
पद्मसागर गणि तपा. विमलसागर गणि शिष्य |
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अतिजीर्ण |
| 80828 |
सिद्धांत कौमुदी व्याकरण- पूर्वार्ध |
भट्टोजी दीक्षित |
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| 80830 |
सामवेद गान |
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| 80832 |
ऋषभदेव पंचाशिका (धनपाल पंचाशिका) अव.सह |
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श्रेष्ठ |
| 80833 |
सरस्वती छंद |
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| 80843 |
सिद्धांत चंद्रिका |
सदानंद मुनि खरतर |
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| 80845 |
सार संग्रह |
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ज्योतिष |
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| 80850 |
सारस्वत पक्रिया |
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| 80851 |
हितशिक्षा बत्रीसी |
क्षमाकल्याण पाठक |
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| 80853/3 |
सतियागुण स्वाध्याय |
जयमाल रिषि |
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| 80856 |
अमरकोश - वृत्ति सह (प्रथम कांड) |
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श्रेष्ठ |
| 80857 |
अमरकोश - सटीक- द्वितीय कांड |
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| 80860 |
सार संग्रह |
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ज्योतिष |
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| 80861 |
सुभाषित मंजरी |
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| 80862 |
षट् पंचाशिका |
उत्पल भट्ट |
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| 80865 |
वसंतराज शाकुन |
वसंतराज |
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| 80866 |
वाग्भटालंकार वृत्ति - [परिच्छेद 1-5] |
सिंहदेवगणि |
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| 80873 |
सीमंधर विनती- सस्तबक |
यशोविजय उपा. |
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| 80874 |
शिशुपाल वध |
माघ कवि |
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मध्यम |
| 80875 |
आषाढा भूति चोपाई आदि |
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| 80876 |
सूर्वरन्नादेवी पूजा |
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