| 56693 |
मधु मालती कथा भाषा |
— |
— |
1813 |
मध्यम |
| 40113/4 |
पार्श्वनाथ जिन स्तवन |
वाचक जयसौभा (?) |
स्तुति |
1815 |
जीर्ण |
| 26731 |
अंगचूलिया |
— |
आगम |
1819 |
श्रेष्ठ |
| 61713 |
भक्तामर स्तोत्र वृत्ति |
— |
स्तोत्र |
1819 |
श्रेष्ठ |
| 83183 |
नयचक्र - बाला. |
देवचंद्र गणि खरतर. |
— |
1825 |
मध्यम |
| 45365/26 |
जिनलाभ सूरि भास |
सौभाग्य वलभ |
गीत |
1826 |
श्रेष्ठ |
| 59839 |
षोडशक टीका |
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1828 |
मध्यम |
| 43354 |
चैत्यवंदन आदि-गुटको |
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— |
1829 |
श्रेष्ठ |
| 5346 |
खंडाजोयण गाथा बालावबोध |
— |
जैनभूगोल |
1829 |
श्रेष्ठ |
| 82851 |
विशेष महाकाव्य (ऋतुवर्णन काव्य) सह वृत्ति |
कालिदास |
— |
1829 |
— |
| 46324 |
कथा प्रस्ताव रत्नावलीवृत्ति |
केसरविमल केसरविमल |
कथा |
1831 |
श्रेष्ठ |
| 59955 |
आवश्यक निर्युक्ति बालावबोध |
— |
— |
1831 |
श्रेष्ठ |
| 83317/1 |
रस रहस्य |
मिश्र कुलपति |
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1831 |
श्रेष्ठ |
| 60533 |
आठ कर्मनी 158 प्रकृतिनो विचार बालावबोध |
— |
तत्त्वज्ञान |
1832 |
श्रेष्ठ |
| 43554 |
बारह व्रत आदरवानी टीप (वस्त्र के उपर लिखा हुआ) |
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1833 |
मध्यम |
| 55124 |
मार्क्कंडेय पुराणांतर्गत " चंडीस्तोत्र प्रयोग विधि:" |
नागोजी भट्ट |
तंत्र |
1835 |
जीर्ण |
| 81371 |
गोपालसहस्त्रनाम |
— |
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1836 |
— |
| 80756 |
उत्तराध्ययन सूत्र- अवचूरि सह |
— |
आगम |
1837 |
मध्यम |
| 81446 |
रामगीता (अध्यात्म रामायणान्तर्गत) सह पंचम सर्ग |
— |
— |
1837 |
— |
| 83461/6 |
विष्णु हृदय स्तोत्र |
— |
— |
1839 |
श्रेष्ठ |
| 60749 |
लघुशांति वृत्ति |
— |
स्तोत्र |
1842 |
मध्यम |
| 82640 |
अनेकार्थ (ध्वनि) मंजरी (कोश) |
— |
— |
1844 |
मध्यम |
| 48584 |
वजेधरमसूरीनी सज्झाय |
कविनोदसागर |
गीत |
1844 |
श्रेष्ठ |
| 43254 |
पार्श्वनाथ भगवानने कमठनो उपसर्ग अने धर्मेंद्रनुं निवारण |
— |
— |
1844 |
श्रेष्ठ |
| 43498 |
मन्दिर के जीर्णोद्धार के लिए मदद पत्र |
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— |
1848 |
— |
| 83392/2 |
वृंद सतसैया |
वृंद कवि |
— |
1849 |
श्रेष्ठ |
| 16059 |
शकुनावली (केवलज्ञान भास्कर) |
— |
ज्योतिष |
19 |
श्रेष्ठ |
| 83479/29 |
वैद्यक- औषधो |
— |
— |
19 |
श्रेष्ठ |
| 83473/6 |
आंकना घडीया |
— |
— |
19 |
मध्यमजीर्ण |
| 83473/4 |
आंकना घडीया |
— |
— |
19 |
मध्यम |
| 83415/19 |
सवैया |
— |
— |
19 |
श्रेष्ठ |
| 14102/1 |
स्थानकवासी पौषध चर्चा सज्झाय |
— |
— |
19 |
जीर्ण |
| 43236/1 |
बे घोडानी लगाम पकडी उभेलो पुरुष (रंगीन) |
— |
— |
19 |
श्रेष्ठ |
| 43235/3 |
सुशोभन (रंगीन) |
— |
— |
19 |
खंडित |
| 43242/1 |
विश्वरूप दर्शन (रंगीन) |
— |
— |
19 |
श्रेष्ठ |
| 43242/6 |
रास माला (रंगीन) |
— |
— |
19 |
श्रेष्ठ |
| 43242/3 |
कालिनाग दमन (रंगीन) |
— |
— |
19 |
श्रेष्ठ |
| 43242/2 |
वलोणुं (रंगीन) |
— |
— |
19 |
श्रेष्ठ |
| 43240/2 |
गुरु व्याख्यान (बेटुकडा छे.) (रंगीन) |
— |
— |
19 |
खंडित |
| 43240/3 |
जैनयात अरावण उपर तीर्थंकर (रंगीन) |
— |
— |
19 |
खंडित |
| 43240/1 |
विनय सोमगणि व्याख्यान (रंगीन) |
— |
— |
19 |
खंडित |
| 43239 |
चतुर्मुख अष्टाश्व चित्र |
— |
— |
19 |
खंडित |
| 43208/4 |
पार्श्वनाथ-लक्ष्मी-सरस्वती (रंगीन) |
— |
— |
19 |
श्रेष्ठ |
| 43236/5 |
पांखो वाली स्त्री (रेखाचित्र) |
— |
— |
19 |
खंडित |
| 43236/4 |
आलस खाती स्तर (रेखाचित्र) |
— |
— |
19 |
खंडित |
| 43236/3 |
तकीये बेठेली स्त्री विगेरे (रेखाचित्र) |
— |
— |
19 |
खंडित |
| 82742 |
विदग्ध मुखमंडन काव्य - सह अवचूरि |
धर्मदास |
— |
19 |
— |
| 43208/6 |
अष्ट मंगल (रेखाचित्र) |
— |
— |
19 |
खंडित |
| 43208/8 |
तीर्थंकरनां बे चित्रो (रंगीन) |
— |
— |
19 |
श्रेष्ठ |
| 43208/9 |
तीर्थंकर तथा ईन्द्र-ईन्द्राणि (रंगीन) |
— |
— |
19 |
खंडित |